पीलिया में शिशु की त्वचा और आँखों का सफ़ेद हिस्सा पीला दिखने लगता है। नवजात शिशुओं में यह बहुत आम है और आमतौर पर नुकसान नहीं करता, लेकिन कभी-कभी इसका इलाज ज़रूरी होता है, इसलिए यह जानना अच्छा है कि किन बातों पर ध्यान दें।
नवजात शिशुओं को पीलिया क्यों होता है?
पीलिया बिलीरुबिन के जमा होने से होता है। बिलीरुबिन एक पीला पदार्थ है जो लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने पर बनता है। नवजात शिशु का लिवर अभी विकसित हो रहा होता है और शुरुआत में बिलीरुबिन को जल्दी साफ़ नहीं कर पाता। समय से पहले जन्मे शिशुओं को यह होने की संभावना ज़्यादा होती है।
किन बातों पर ध्यान दें
- पीली त्वचा, ख़ासकर चेहरे और शरीर पर
- आँखों का सफ़ेद हिस्सा पीला होना, या मुँह के अंदर पीलापन
- गहरे पीले या भूरे रंग का पेशाब, या फीकी, क्रीम जैसी पॉटी (मल)
पीला रंग दिन की रोशनी में ज़्यादा आसानी से दिख सकता है। शिशु की नाक की नोक या माथे को हल्के से दबाने से भी मदद मिल सकती है। काली या भूरी त्वचा पर इसे देखना मुश्किल हो सकता है, इसलिए आँखें और मुँह के अंदर का हिस्सा भी जाँचें।
यह कितने समय तक रहता है?
ज़्यादातर शिशुओं में पीलापन लगभग 3 दिन की उम्र में सबसे ज़्यादा दिखता है, और इसे जाने में आमतौर पर लगभग 2 हफ्ते लगते हैं। अगर पीलिया 2 हफ्ते से ज़्यादा (या समय से पहले जन्मे शिशुओं में 3 हफ्ते से ज़्यादा) रहे, तो डॉक्टर से जाँच करवानी चाहिए।
मैं कैसे मदद कर सकती हूँ?
शिशु को नियमित रूप से, दिन में लगभग 8 से 12 बार दूध पिलाने से उसे बिलीरुबिन साफ़ करने में मदद मिलती है। अगर शिशु नींद में रहता है, तो उसे दूध पिलाने के लिए जगाने की कोशिश करें, और अगर दूध पिलाने में दिक्कत हो तो अपनी दाई या डॉक्टर से मदद लें। पीलिया के इलाज के लिए शिशु को सीधी धूप में न रखें।
मदद कब लें
- शिशु 24 घंटे से कम उम्र का है और पीला दिख रहा है: तुरंत डॉक्टरी मदद लें।
- शिशु पीला दिख रहा है और ठीक से दूध नहीं पी रहा, बहुत ज़्यादा सो रहा है या मुश्किल से जाग रहा है।
- उसका पेशाब गहरा पीला या भूरा है, या पॉटी फीकी या चॉक जैसी सफ़ेद है। डॉक्टर को दिखाने के लिए एक नैपी रख लें।
- पीलिया 2 हफ्ते से ज़्यादा रहता है।
अगर पीलिया का इलाज ज़रूरी हो, तो आमतौर पर अस्पताल में लाइट थेरेपी (फ़ोटोथेरेपी) दी जाती है, जो सुरक्षित और असरदार है।
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