शिशुओं और छोटे बच्चों में बुखार बहुत आम है। ज़्यादातर बार यह किसी इन्फ़ेक्शन की वजह से होता है जो अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन छोटे शिशुओं में इसे गंभीरता से लेना चाहिए। यह गाइड बताती है कि कब घर पर देखभाल करें और कब डॉक्टरी मदद लें।
बुखार किसे माना जाता है?
बच्चों में 38°C (100.4°F) या उससे ज़्यादा तापमान को बुखार माना जाता है। शिशु का तापमान जाँचने का आसान तरीका है बगल (आर्मपिट) में डिजिटल थर्मामीटर लगाना। छूने पर शिशु गर्म लग सकता है, उसका चेहरा लाल दिख सकता है या उसे पसीना आ सकता है।
तुरंत डॉक्टरी सलाह लें अगर आपका शिशु
- 3 महीने से छोटा है और उसका तापमान 38°C या उससे ज़्यादा है
- 3 से 6 महीने का है और उसका तापमान 39°C या उससे ज़्यादा है
- बुखार के साथ बीमारी के दूसरे लक्षण भी हैं, जैसे दाने (रैश)
- 5 दिन या उससे ज़्यादा से बुखार है
- दूध नहीं पी रहा, उसकी नैपी आम दिनों से कम गीली हो रही है, या वह असामान्य रूप से सुस्त या चिड़चिड़ा लग रहा है
अपने स्थानीय आपातकालीन नंबर पर कॉल करें अगर
- शिशु के शरीर पर ऐसे दाने हैं जो गिलास से दबाने पर भी फीके नहीं पड़ते
- शिशु को साँस लेने में दिक्कत हो रही है, या वह बहुत ढीला पड़ गया है या मुश्किल से जाग रहा है
- शिशु को दौरा (सीज़र) पड़ा है, या उसकी त्वचा, होंठ या जीभ नीले, पीले (फीके) या धब्बेदार हैं
घर पर बच्चे की देखभाल
- भरपूर तरल पिलाएँ। अगर शिशु माँ का दूध पीता है, तो हमेशा की तरह स्तनपान जारी रखें।
- उसे हल्के कपड़े पहनाएँ और कमरे को आरामदायक ठंडा रखें। ठंडे पानी से स्पंज न करें।
- रात में भी, उसे बार-बार देखते रहें।
बुखार की दवाएँ
अगर बच्चा परेशान या बेचैन है तो पैरासिटामोल या आइबुप्रोफ़ेन मदद कर सकती है; मकसद बच्चे को बेहतर महसूस कराना है, सिर्फ़ तापमान का नंबर कम करना नहीं। हमेशा पैकेट पढ़ें या फ़ार्मासिस्ट से पूछें कि दवा और उसकी खुराक आपके बच्चे की उम्र और वज़न के हिसाब से सही है।
- 2 महीने से छोटे शिशु को पैरासिटामोल न दें, जब तक डॉक्टर न कहे।
- 3 महीने से छोटे या 5 kg से कम वज़न वाले शिशु को, या चिकनपॉक्स वाले या पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) वाले बच्चे को आइबुप्रोफ़ेन न दें।
- दोनों दवाएँ बारी-बारी से न दें, जब तक डॉक्टर या नर्स ऐसा करने की सलाह न दें।
पक्का नहीं पता कि आपका शिशु कितने हफ्ते का है? हमारा Baby Age Calculator इस्तेमाल करें।