प्री-एक्लेम्पसिया: चेतावनी के लक्षण, ख़तरे के कारण और इलाज

प्री-एक्लेम्पसिया क्या है, किन चेतावनी वाले लक्षणों में तुरंत मदद चाहिए, किसे ज़्यादा ख़तरा है और गर्भावस्था में व जन्म के बाद इसका इलाज कैसे होता है।

प्री-एक्लेम्पसिया गर्भावस्था की एक स्थिति है जिसमें ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। यह सबसे ज़्यादा गर्भावस्था के 20वें हफ्ते के बाद होता है, लेकिन यह गर्भावस्था में कभी भी हो सकता है और कभी-कभी जन्म के कुछ दिनों या हफ्तों बाद भी। ज़्यादातर मामले हल्के होते हैं, लेकिन यह आपके और आपके शिशु के लिए गंभीर हो सकता है, इसलिए इसके लक्षण जानना ज़रूरी है।

शुरुआती लक्षण जिन पर आपका ध्यान शायद न जाए

सबसे शुरुआती लक्षण हैं हाई ब्लड प्रेशर और पेशाब में प्रोटीन। आप ख़ुद इन्हें शायद ही महसूस करें, इसीलिए आपकी नियमित प्रसव-पूर्व (एंटीनेटल) जाँच में ब्लड प्रेशर और पेशाब की जाँच की जाती है। कोशिश करें कि ये जाँचें छूटें नहीं।

ऐसे लक्षण जिन पर तुरंत ध्यान देना ज़रूरी है

  • तेज़ सिरदर्द जो साधारण दर्द की दवाओं से ठीक न हो
  • नज़र की समस्याएँ, जैसे धुँधला दिखना या चमकती रोशनी दिखाई देना
  • पसलियों के ठीक नीचे दर्द
  • चेहरे, हाथों या पैरों में अचानक सूजन
  • बहुत ज़्यादा अस्वस्थ महसूस करना, या उल्टी होना

अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण हो, तो तुरंत अपनी दाई, डॉक्टर या मैटर्निटी यूनिट से संपर्क करें। अगर उनसे संपर्क न हो सके, तो अपने स्थानीय आपातकालीन नंबर पर कॉल करें। अपनी अगली अपॉइंटमेंट का इंतज़ार न करें।

यह किसे होने की संभावना ज़्यादा है?

  • पिछली गर्भावस्था में प्री-एक्लेम्पसिया हुआ हो
  • गर्भावस्था से पहले डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी की बीमारी
  • कोई ऑटोइम्यून बीमारी, जैसे ल्यूपस
  • पहली गर्भावस्था, जुड़वाँ बच्चों की गर्भावस्था, या 40 साल या उससे ज़्यादा उम्र
  • बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 35 या उससे ज़्यादा

अगर आपको ज़्यादा ख़तरा है, तो डॉक्टर गर्भावस्था के 12वें हफ्ते से जन्म तक रोज़ कम खुराक वाली एस्पिरिन लेने की सलाह दे सकते हैं। जब तक डॉक्टर या दाई ने सलाह न दी हो, एस्पिरिन या कोई दूसरा सप्लीमेंट शुरू न करें।

इसका इलाज कैसे होता है

आमतौर पर आपके ब्लड प्रेशर, पेशाब और ख़ून की ज़्यादा जाँचें होंगी, और शिशु की बढ़त देखने के लिए स्कैन होंगे। बहुत से लोगों को ब्लड प्रेशर कम करने की दवा दी जाती है। इसका एकमात्र इलाज शिशु का जन्म है, इसलिए अगर प्री-एक्लेम्पसिया गंभीर हो जाए, तो आपकी देखभाल टीम शिशु का जन्म जल्दी करवाने की सलाह दे सकती है।

जन्म के बाद

लक्षण आमतौर पर जन्म के बाद ख़त्म हो जाते हैं, लेकिन वे जारी भी रह सकते हैं या जन्म के बाद शुरू भी हो सकते हैं। आपको कुछ हफ्तों तक ब्लड प्रेशर की दवा और नियमित ब्लड प्रेशर जाँच की ज़रूरत हो सकती है। शिशु के जन्म के बाद अगर आपको कोई भी चेतावनी वाला लक्षण हो, तो तुरंत मदद लें।

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चिकित्सा दिशानिर्देशों पर आधारित

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यह लेख केवल जानकारी के लिए है और डॉक्टर या दाई की सलाह का विकल्प नहीं है।